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सामान्य हिंदी (वर्णमाला)

सामान्य हिंदी (वर्णमाला)
सामान्य हिंदी (वर्णमाला)

(वर्णमाला)

वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहा जाता है।


ध्वनि या वर्ण

भाषा की सबसे छोटी इकाई वर्ण कहलाती हैं।

वाक्य

भाषा की सार्थक इकाई को वाक्य कहा जाता है।

बढ़ते क्रम में भाषा की इकाई

ध्वनि या वर्ण --- अक्षर --- पद --- पदबंध --- उपवाक्य --- वाक्य

✔️ उच्चारण के आधार पर हिंदी में वर्णों की संख्या - 45
✔️ हिंदी वर्णमाला में स्वर होते हैं - 13
✔️ लेखन के आधार पर हिंदी में वर्णों की संख्या - 52 (13 स्वर, 35 व्यंजन, 4 संयुक्त व्यंजन )
✔️ कामता प्रसाद के अनुसार हिंदी वर्णमाला में वर्णों की संख्या - 43


[स्वर]

स्वर वें वर्ण होते हैं जिनका उच्चारण स्वतंत्र रूप से किया जाता है।

✔️ उच्चारण के आधार पर स्वर की संख्या - 11
✔️ परंपरागत रूप से हिंदी वर्णमाला में स्वरों की कुल संख्या - 13


स्वरो का वर्गीकरण

उच्चारण में लगने वाले समय के आधार पर स्वरों का वर्गीकरण :-

1. ह्रस्व स्वर - जिनके उच्चारण में बहुत कम अर्थात एक मात्रा का समय लगे। इसे मूल स्वर भी कहते हैं जैसे - अ, इ, उ, ऋ
2. दीर्घ स्वर -  जिन के उच्चारण में अधिक समय अर्थात दो मात्रा का समय लगे। जैसे -  आ, ई, ऊ, ए, ऐ, औ, आदि
3. प्लुत स्वर -  चीन के उच्चारण में बहुत अधिक समय अर्थात कई मात्राओं का समय लगे। इनका प्रयोग नाटकों के संवादों में किया जाता है जैसे - ओउम आदि।

जीभ के प्रयोग के आधार पर स्वरों का वर्गीकरण :-

1. अग्र स्वर - जैसे- इ, ई, ए, ऐ,
2. मध्य स्वर - जैसे - अ
3. पश्च स्वर - जैसे- आ, उ, ऊ, ओ, औ, ऑ

ओठो के आधार पर स्वरो का वर्गीकरण :-

1. अवृत मुखी - वह स्वर जिनके उच्चारण करते समय ओंठ गोलाकार नहीं होते। जैसे - अ,आ, इ, ई, ए, ऐ
2. वृत मुखी - वे स्वर जिनके उच्चारण में ओंठ गोलाकार होते हैं। जैसे - उ, ऊ, ओ, औ, ऑ

मुख खुलने के आधार पर स्वरों का वर्गीकरण :- 

1. विर्वृत - मुख्य द्वार पूरा खुला रहता है जैसे - आ
2. अर्ध विर्वृत - मुख आधा खुला रहता है जैसे - अ, ऐ, औ, ऑ
3. अर्ध संवृत - उच्चारण काल में मुख आधा बंद रहता है जैसे - ए, ओ
4. संवृत - उच्चारण के समय मुख पूरा बंद रहता है जैसे - इ, ई, उ, ऊ

निरनुनासिक या मौखिक स्वर - 

जिनके उच्चारण में हवा केवल मुंह से निकलती है जैसे - अ, आ, इ,.. आदि।

अनुनासिक स्वर - 


जिनके उच्चारण में हवा नाक एवं मुंह दोनों से निकले जैस - अं, आँ आदि


आगत स्वर -
ऐसे स्वर जिन्हें किसी अन्य भाषा से हिंदी में प्रयोग किया जाता है। जैसे - ऑ ( डॉक्टर ऑफिस सॉल्वर इत्यादि)
अयोगवाह - अयोगवाह में अनुस्वार (ं )एवं विसर्ग (:) को स्वरों के साथ रखा जाता है।
Note :- (अं), (अ:) उच्चारण की दृष्टि से व्यंजन तथा लेखन की दृष्टि से स्वर होते हैं।
Note :- सभी स्वर सघोष धनिया एवं अल्पप्राण होते हैं।

[व्यंजन]

स्वरों की सहायता से बोले जाने वाले वर्ण व्यंजन कहलाते हैं।

वर्णमाला

✔️ हिंदी वर्णमाला में व्यंजनों की संख्या - 33


व्यंजनों के प्रकार:-

स्पर्श व्यंजन :-

जिन व्यंजनों के उच्चारण के समय कोई ना कोई भाग मुंह के किसी न किसी भाग से स्पर्श करें वह स्पर्शी व्यंजन कहलाते हैं।
स्पर्श व्यंजन
स्पर्श व्यंजन
✔️ हिंदी में स्पर्श व्यंजनों की संख्या - 25


अनुनासिक व्यंजन :- 

जिन व्यंजन के उच्चारण में हवा नासिका से बाहर निकले अनुनासिक व्यंजन कहलाते हैं।
Note :- प्रत्येक वर्ग का अंतिम अक्षर अनुनासिक व्यंजन होता है 
✔️ अनुनासिक व्यंजनों की संख्या - 5

उष्म व्यंजन :- 

जिनके उच्चारण में एक प्रकार की गर्माहट जैसी पैदा होती है। जैसे - श, ष, स, ह
उष्म व्यंजन को संघर्षी व्यंजन भी कहते हैं।
उष्म व्यंजन
उष्म व्यंजन

अंतस्थ व्यंजन :- 

जिन वर्णों के उच्चारण स्वर एवं व्यंजन के बीच हो।
जैसे- य, र, ल, व 
अंतस्थ व्यंजन

उत्क्षिप्त व्यंजन :- 

जिनके उच्चारण में जीव उल्टी तालु से होकर छिटक जाती है।
जैसे - ड़, ढ़
ड़ - मूर्धन्य, संघोष, अल्पप्राण
ढ़ - मूर्धन्य, संघोष, महाप्राण 

संयुक्त व्यंजन :- 

संयुक्त व्यंजनों का उच्चारण अन्य व्यंजनों की सहायता से किया जाता है।
✔️ संयुक्त व्यंजनों की संख्या - 4 

संयुक्त व्यंजन


आगत ध्वनियां :- 

इन्हें अरबी - फारसी ध्वनि में कहते हैं।
जैसे- क़, ख़, ज़, फ़ आदि।
ज़ - वत्स्ये, सघोष, अल्पप्राण
फ़ - दंत-ओष्ठ, अघोष, महाप्राण

घोषत्व के आधार पर व्यंजन के प्रकार :- 

1. अघोष :- 

जिन वर्णों के उच्चारण के समय स्वर तंत्रियों में कोई कंपन पैदा न हो अघोष वर्ण कहलाते हैं।

प्रत्येक वर्ग का पहलादूसरा व्यंजन अघोष होता है।
जैसे -
क वर्ग - क, ख
च वर्ग - च, छ
ट वर्ग - ट, ठ
त वर्ग - त, थ
प वर्ग - प, फ

2. सघोष :- 

जिन वर्णों के उच्चारण के समय स्वर तंत्रियों में  कंपन पैदा हो अघोष वर्ण कहलाते हैं।

प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा व पांचवा वर्ण सघोष होता है।
जैसे -
सघोष वर्ण

प्राण के आधार पर व्यंजन के प्रकार :- 

1. अल्पप्राण :- 

जिन व्यंजनों के उच्चारण में मुख से कम हवा बाहर निकले।
प्रत्येक वर्ग का पहला, तीसरा, पांचवा व्यंजन अल्पप्राण होता है।

2. महाप्राण :- 

जिन व्यंजनों के उच्चारण में मुख से अधिक हवा बाहर निकले।

प्रत्येक वर्ग का दूसराचौथा व्यंजन महाप्राण होता है।




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