कुमाऊ का चंद्र राजवंश
- इतिहास सामग्री के अभाव में अभी तक यह निर्धारित नहीं हो सका है कि चंद राज्य वंश का वास्तविक संस्थापक कौन था।
- सोमचंद तथा थोहरचन्द दोनों को ही चंद्र वंश का संस्थापक माना जाता है।
सोमचंद :-
इससे संबंधित दो अवधारणाएं पर चली थी पहले अवधारणा के अनुसार-
- प्रसिद्ध विद्वान एटकिंसन सोमचंद को चंद वंश का संस्थापक मानते हैं।
- जब कत्यूरी साम्राज्य का अंतिम शासक ब्रह्मदेव कत्यूरी राजा बना तब पूरा साम्राज्य षड्यंत्र, अशांति, कलह का केंद्र बन गया।
- राज परिवार के सारे सदस्य भूमि के किसी भी टुकड़े पर अपना स्वामित्व जताने लगे।
- पूरे राज्य में एक अराजकता फैल गई और ब्रह्मदेव कत्यूरी एक अयोग्य शासक सिद्ध हुआ।
- इसी कारण कुछ गणमान्य लोग कन्नौज के तत्कालीन नरेश के पास गए और उन्होंने इस राज्य में फैली अशांति के बारे में उन्हें बताया इसी कारण कन्नौज नरेश ने अपने भाई सोमचंद्र को कुमाऊं भेजा।
- सोमचंद ने बहुत जल्दी स्थिति को संभाल लिया और अपनी योग्यता का परिचय दिया।
- ब्रह्मदेव कत्यूरी सोमचंद की योग्यता से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह सोमचंद से कर दिया और कोतवाल छावनी [चंपावत] के भूमि दहेज के रूप में भेंट दे दी।
- सोमचंद ने सूयो नामक स्थान पर एक किला बनवाया और राज्य करने लगा।
दूसरी अवधारणा के अनुसार -
- कन्नौज नरेश के भाई सोमचंद बद्रीनाथ की यात्रा पर आए थे और ब्रह्मदेव ने उनके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर अपनी कन्या का विवाह सोमचंद से कर दिया और दहेज के रूप में उन्हें चंपावत की छोटी सी जागीर दे दी।
- सोमचंद उत्तराखंड में 1019 - 1020 ईस्वी में आया था।
- उत्तराखंड में चंद्र वंश की स्थापना लगभग 1025 ईस्वी में हुई।
- सोमचंद शिव का उपासक था।
- सोमचंद ने चंपावत को अपनी राजधानी बनाया।
- सोमचंद के समय पूरे कुमाऊं में अनेक जातियों का अधिपत्य था जिसमें नाग, खस, द्रविड़, मेंद, चांडाल प्रमुख थे।
- यह जातियां दो खंडों में बटी थी जिनके मुखिया मेहरा या फर्त्याल थे।
- सोम चंद्र ने सबसे पहले चार किलेदार नियुक्त किए- 1. कार्की , 2. बोरा, 3. तडागी 4. चौधरी
- यह चारों किलेदार नेपाल के मूल निवासी थे।
- जिन्हें 'चार आल' या 'चराल' भी कहा जाता था।
- सोमचंद ने सबसे पहले दोण कोट के रावत राजा को हराया ।
- मेहरा, फर्त्यालों को उसने मंत्री व सेनापति बनाया।
- सोमचंद ने कुछ योग्य एवं विद्वान ब्राह्मणों के अलावा राजकोली, बखरिया, विश्वकर्मा, तमोटा, बाजदार, बजनिया राजबुंगा केले के आसपास बसाएं।
- सोमचंद ने ग्रामों में बूढ़ो एवं सयानो की नियुक्ति की। जोकि अपने अपने गांव में पुलिस का कार्य करते और लगान वसूल कर राजा तक पहुंचाते थे।
- सोमचंद एक छोटा सा मांडलिक राजा था और डोटी के राजा को कर दिया करता था।
- डोटी के राजा मल्लवंशी थे और रैंका राजा या राई राजा कहलाते थे।
- सोमचंद के समय डोटी का राजा जयदेव था।
- मल्ल वंश का प्रथम शासक वामदेव था।
- वामदेव ने अपनी इष्ट देवी चंपावती के नाम पर अपनी राजधानी का नाम चंपा रखा।
- सोमचंद के बाद उसका पुत्र आत्म चंद राजा बना।
आत्म चंद:-
- उसने लगभग 20 वर्षों तक शासन किया।
- उसने चंद्र राज्य यथावत बनाए रखा।
पूर्ण चंद:-
- इसने लगभग 1066 ईसवी से 1084 ईस्वी तक शासन किया।
- पूर्ण चंद के बाद इसका पुत्र इंद्र चंद राजा बना।
इंद्र चंद:-
- इसने अपने शासनकाल में रेशम उत्पादन किया व रेशमी वस्त्र बनाने के कारखाने लगवाए।
- रेशमी वस्त्रों के व्यापार के लिए नेपाल के मार्ग से चीन से व्यापारिक संबंध साधा गया।
- इंद्र चंद के बाद क्रमशः सुधा चंद, हरिचंद्र, वीणा चंद चंदवंश के अगले राजा हुए। इनकेे कोई विशेेष घटना नहीं घटित हुई।
- वीणा चंद एक विलासी राजा था।
- वीणा चंद के शासनकाल में खस राजाओं को सिर उठाने का मौका मिला।
- यह खस राजा भी डोटी नरेशो के अधीन थे।
- चंपावत के बालेश्वर मंदिर से क्रांचल देव का 1223 ईस्वी का एक लेख प्राप्त हुआ जिसमें 10 मांडलिक राजाओं का नाम उल्लिखित है। जो इस प्रकार हैं:-
1. श्री याहडदेव मांडलिक
2. श्री चंद्र देव मांडलिक
3. श्री हरिराज राउत राजा
4. श्री अनिलादित्य राउत राजा
5. श्री विनय चंद्र मांडलिक
6. श्री विद्याल चंद्र मांडलिक
7. श्री जयसिंह मांडलिक
8. श्री जीहलदेव मांडलिक
9. श्री बल्लालदेव मांडलिक
10. श्री मूसदेव मांडलिक
- यह मांडलिक राजा एक प्रकार के सामंत होते थे जो अपने अधिपति के अधीन शासन करते थे।
- जिनके अधिपति नेपाल स्थित डोटी राज्य के होते थे।
- गोपेश्वर के त्रिशूल लेख से ज्ञात होता है कि 1191 ईस्वी में यहां अशोक चल्ल का शासन था।
- अशोक चल्ल वैराथ कुल का राजा था। और नेपाल स्थित डॉटी राज्य के "दूलू" का मूलनिवासी था।
- अशोक चल्ल ने यहां पर अपना सामंत पुरुषोत्तम सिंह को नियुक्त किया था। जोकि मांडलिक राजाओं के ऊपर शासन करता था।
- वीणा चंद के बाद वीरचंद कुमाऊ का राजा बना।
- वीणा चंद के शासनकाल में जो विप्लव उत्पन्न हुआ था वह अशोक चल्ल की सहायता से वीरचंद ने किया था।
- लगभग 1206 ईस्वी में वीरचंद की मृत्यु हो गई।
- वीरचंद की मृत्यु के बाद क्रमशः नरचंद, थोहरचद, त्रिलोकचंद, उमर चंद्र, धर्मचंद, अभय चंद, कर्म चंद राजा हुए।
- कर्म चंद 1 वर्ष शासन करने के बाद मणकोटी राजा के पास चला गया उसके जगह ज्ञानचंद गद्दी पर बैठा।
ज्ञानचंद:-
- इसने लगभग 1365 ईस्वी से 1420 ईस्वी तक शासन किया।
- वह चंद वंश का पहला ऐसा शासक था जो दिल्ली के सुल्तान फिरोजशाह तुगलक के दरबार में भेंट अर्पित करने गया था। फलस्वरूप फिरोज शाह ने तराई का क्षेत्र ज्ञानचंद को सौंप दिया। और ज्ञानचंद को "गरुड़" की उपाधि से नवाजा।
- इस समय तराई भाबर क्षेत्र में कटेहरियों का आधिपत्य था।
- ज्ञानचंद गरुड़ेश्वर विष्णु का उपासक था और गरुड़ उसका राज्य चिन्ह था।
- शेरा खड़ कोट [पिथौरागढ़ खास] के ताम्रपत्र में ज्ञान चंद के लिए राजाधिराज महाराज शब्द का प्रयोग किया गया है।
- 1420 से 1433 ईस्वी के मध्य हरिहर चंद, द्वान चंद, आत्म चंद, व हरिचंद ने शासन किया।
- उनके बाद विक्रम चंद गंदी पर बैठा।
- विक्रम चंद के बाद धर्म चंद राजा बना।
- धर्मचंद के बाद भारती चंद्र राजा बना।
- कुमाऊं के इतिहास में भारती चंद के पंवाडे बहुत महत्वपूर्ण है।
- कुमाऊं के प्रसिद्ध वीरांगना भागाधौन्यान के साथ भारती चंद के द्वंद युद्ध का भी पंवाड़ों में गुणगान किया गया है।
- भारती चंद ने 1437 ईस्वी लेकर 1477 ईस्वी तक शासन किया।
- भारती चंद जैसे एक स्वाभिमानी राजा को नेपाल की अधीनता स्वीकार नहीं थी।
- भारती चंद चंद वंश का पहला ऐसा शासक था जिसने एक विशाल सेना लेकर डोटी राज्य के विरुद्ध संघर्ष प्रारंभ कर दिया था।
- भारती चंद ने पिथौरागढ़ के मुख्यालय में अपनी सेना का पड़ाव बना दिया।
- जिसका साक्ष्य यहां देवसिंह मैदान के पास अब बंद पड़ा कटकू नौला है।
- दूसरा पड़ाव काली नदी के आसपास बड़ालू से लेकर गौडीहाट तक के क्षेत्र में जमा लिया।
- जिस स्थान पर शिविर लगा था उसका नाम बलीचौड़ था यह काली नदी के किनारे था।
- 12 वर्षों तक नेपाल का घेरा डालने के बाद अंत में मल्ल राजा पराजित हुए।
- और डोटी के अधिपत्य से चंद्र राज्य को 1451-52 में मुक्ति मिल गई।
- भारती चंद के समय यक्षमल्ल या जयमल्ल नेपाल [डोटी] का राजा था।
- भारती चंद के समय सीरा मंडल में बलीनारायण संसार मल्ल शासक था।
- भारती चंद्र ने अपने पुत्र रत्न चंद की सहायता से सौर, सीरा, थल पर अधिकार कर लिया।
- सोर विजय के बाद बम का राज्य समाप्त हो गया।
- सीरा के मल्ल भी काली नदी के पार भाग गए।
- सीरा में भारती चंद ने डूंगरा बसेड़ा को अपना सामंत नियुक्त किया।
- डूंगरा बसेड़ा के बाद मदन सिंह व राय सिंह बसेड़ा सीरा के सामंत बने।
- परंतु यह सामंत यहां अधिक समय तक शासन नहीं कर सके।
- इनका शासन यहां पर 1452 ईस्वी से लेकर 1539 ईस्वी तक रहा।
- मल्लो ने सीरा पर पुनः अधिकार कर लिया।
- क्रमशः शोभा मल्ल व हरिमल्ल सीरा के राजा बने।
- शोभा मल्ल ने चंदो से वैवाहिक संबंध स्थापित कर लिए और अपनी पुत्री का विवाह बोलो कल्याण चंद के साथ कर दिया।
- 1590 ईस्वी में कल्याण चंद के पुत्र रुद्र चंद ने हरिमल्ल को पराजित कर सीरा को अपने चंद राज्य में मिलाया और विजय के उपलक्ष में उसने थल में एक शिव मंदिर की स्थापना कर दी।
- भारती चंद्र के बाद उसका पुत्र रत्न चंद 1477 ईस्वी में गद्दी पर बैठा और उसने 1488 ईस्वी तक शासन किया।
- भारती चंद्र का एक अन्य पुत्र सुजान कुंवर भी था जिसका उल्लेख खेतीखन ताम्रपत्र में हुआ है।
- रत्न चंद के बाद 1488 ईस्वी में कीर्ति चंद राजा बना।
- कीर्ति चंद ने लगभग 1506 ईस्वी तक शासन किया।
- कीर्ति चंद के बाद प्रताप चंद, तारा चंद, मानिकचंद, कल्याण चंद, पूर्ण चंद व भीष्म चंद राजा हुए।
- कलपानी गाड भेटा [पिथौरागढ़] से प्राप्त ताम्रपत्र में श्री कल्याण चंद्र देव को महाराजाधिराज कहा गया है।
- जोकि भीष्म चंद का उत्तराधिकारी था और उस ने भीष्म चंद द्वारा प्रदत्त ताम्रपत्र का जीर्णोद्धार कराया था।
- श्री कल्याण चंद्रदेव ने 1545 ईस्वी से 1565 ईस्वी तक शासन किया।
- कल्याण चंद्रदेव के बाद उसका पुत्र रुद्र चंद्र देव राजा बना।
- कल्याण चंद्रदेव के दूसरे पुत्र का नाम किशन चंद देव था।
- किशनचंद युवराज काल में ही स्वर्ग सिधार गया था।
- भेटा ताम्रपत्र में किशन चंद को महाराजकुमार युवराज कहा गया है।
- बोलो कल्याण चंद ने मणकोटी राज्य को भी चंद राज्य में मिलाकर चंपावत से राजधानी अल्मोड़ा पहुंचाई और मणकोट के उप्रेती वतो को राज्य कर्मचारी बनाकर अल्मोड़ा ले गया।
रूद्र चंद
- बोलो कल्याण चंद के बाद रुद्र चंद राजा बना।
- वह दिल्ली के मुगल बादशाह अकबर के समकालीन था।
- 1565 से 1587 तक चंद्र राज्य स्वतंत्र राज्य बना रहा किंतु 1587 के बाद रुद्र चंद्र ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली थी।
- रूद्र चंद के शासनकाल में हुसैन खाँ ने तराई पर कब्जा कर लिया था।
- जिस कारण रूद्र चंद को तराई पर हमला करना पड़ा। तराई पर अपना अधिकार कर उसने आधुनिक रुद्रपुर नगर की स्थापना की।
- इस खुशी में रुद्र चंद्र ने अकबर को तिब्बती याक, कस्तूरी हिरणों की खाले आदि भेंट की थी।
- रूद्र चंद्र ने अल्मोड़ा में मल्ला महल किले का निर्माण करवाया था।
- रुद्र चंद्र ने नए सिरे से सामाजिक व्यवस्था स्थापित की थी।
- इसके लिए उसने धर्म निर्णायक नाम की पुस्तक लिखवाई।
- इस पुस्तक में उसने ब्राह्मणों के गोत्र व उनके पारस्परिक संबंधों का अंकन किया।
- उन्होंने गढ़वाल के सरोला ब्राह्मणों (रसोइयों) की तरह कुमाऊं में भी (चौथानी) ब्राह्मणों की मंडली बनाई जो परस्पर विवाह कर सकते थे।
- उन्होंने उनके नीचे पचबिडिए (तिथानी) उनके भी नीचे हलीये या पीतलीये ब्राह्मणों के वर्ग बनाएं।
- उनके समय में गुरु, पुरोहित, वैद्य, पौराणिक, सईस, (बखरिया), राजकोली, पहरी, बाजदार, बजनिया, टम्टा आदि पद निर्धारित किए गए।
- ओले पड़ने पर थाली बजाकर सभी को सतर्क करने वाले ओली ब्राह्मणों का वर्ग बनाया।
- अनाज का छठा भाग गांव से वसूल कर राजधानी पहुंचाने के लिए कैनी-खसो का पद बनाया गया।
- घरों में सेवा कार्य करने के लिए "छयोडे" तथा "छयोडियां" रखवाईं गई।
- शेष सभी सामान्य जनता का नाम "पौड़ी पन्द्रह विस्वा" रखा।
- चंद शासनकाल में भूमि मालिक को थातवान कहा जाता था।
- रूद्र चंद के राजा बीरबल से अच्छे संबंध थे।
- रूद्र चंद ने राज्य के कुछ युवाओं को संस्कृत अध्ययन करने के लिए कश्मीर तथा काशी भेजा था।
- रूद्र चंद के समय त्रेवर्णिक धर्म निर्णय, ययातिचरित्रम, शारागगोदयनाटिका एवं शैयनिक शास्त्र नामक ग्रंथो की रचना हुई।
- शैयनिक शास्त्र पक्षी आखेट पर आधारित ग्रंथ था।
- रुद्र चंद का सेनापति पुरुषोत्तम पंथ था।
- पुरुषोत्तम पंत का उपनाम पुरखु पंत था।
- पुरुषोत्तम पंत पिथौरागढ़ का मूल निवासी था।
- पुरुषोत्तम पंत को कुमाऊं इतिहास का रॉबर्ट ब्रुश कहा जाता है।
- पुरुषोत्तम पंथ मराठी ब्राह्मण जय देव के पुत्र थे।
- सीरागढ़ से मल्ल राजा हरि मल को भगाने में पुरुषोत्तम पंत का मुख्य योगदान था।
- सीरागढ़ का किला जीतने के बाद बोलो कल्याण चंद की पत्नी सती हुई थी।
- पुरुषोत्तम पंत ग्वालदम के युद्ध में राजपूतों के हाथों मारा गया था।
- ग्वालदम युद्ध के समय गढ़वाल का शासक बलभद्र शाह था।
- ग्वालदम का युद्ध 1581 ईस्वी में हुआ।
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